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DR. JITENDER TOMAR PVT. LTD.
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एक इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सक के रूप में हमारा अनुभव यही कहता है कि शरीर हमें कभी अचानक धोखा नहीं देता। कोई भी बीमारी, खासकर Kidney से जुड़ी परेशानी, धीरे-धीरे संकेत देती है। दिक्कत तब होती है जब हम उन संकेतों को पहचान नहीं पाते या उन्हें हल्के में ले लेते हैं।
किडनी शरीर का वह अंग है जो बिना शोर किए लगातार काम करता रहता है। यह खून को साफ करती है, गंदगी बाहर निकालती है, पेशाब बनाती है और शरीर में पानी व नमक का संतुलन बनाए रखती है। जब किडनी कमजोर होने लगती है, तो उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है, लेकिन शुरुआत में लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं।
इलेक्ट्रोपैथी में हम किडनी की बीमारी को सिर्फ एक अंग की खराबी नहीं मानते, बल्कि इसे शरीर के अंदरूनी संतुलन बिगड़ने का संकेत मानते हैं।
Electropathy के अनुसार किडनी का सीधा संबंध इन बातों से होता है:
शरीर की सफाई (detox) प्रक्रिया
खून और लसीका का संतुलन
पानी और मिनरल का सही बंटवारा
शरीर की ऊर्जा और पाचन शक्ति
जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो किडनी पर दबाव बढ़ने लगता है। अगर समय रहते शरीर को संतुलन में न लाया जाए, तो किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।
इलेक्ट्रोपैथी प्रैक्टिस में सबसे आम शिकायत यही होती है कि
“डॉक्टर साहब, थकान रहती है, मन नहीं लगता, शरीर भारी-सा लगता है।”
जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो शरीर की गंदगी पूरी तरह बाहर नहीं निकलती। इसका सीधा असर ऊर्जा पर पड़ता है। मरीज को बिना ज्यादा मेहनत के भी कमजोरी महसूस होने लगती है।
किडनी की परेशानी का सबसे पहला और साफ संकेत पेशाब से मिलता है:
रात में बार-बार पेशाब आना
पेशाब की मात्रा का कम या ज्यादा होना
पेशाब में झाग दिखना
पेशाब का रंग गहरा होना
पेशाब करते समय जलन
इलेक्ट्रोपैथी के अनुसार ये संकेत बताते हैं कि शरीर की सफाई प्रक्रिया ठीक से नहीं चल रही।
सुबह आंखों के नीचे सूजन, पैरों में भारीपन या टखनों में फुलाव – ये सभी इस बात का संकेत हो सकते हैं कि शरीर में फालतू पानी जमा हो रहा है।
जब किडनी कमजोर पड़ती है, तो पानी और नमक को बाहर निकालने की उसकी क्षमता घट जाती है। इलेक्ट्रोपैथी में इसे लसीका और जल संतुलन की गड़बड़ी माना जाता है।
किडनी की शुरुआती खराबी में कई लोगों को लगता है कि:
भूख पहले जैसी नहीं रही
खाना अच्छा नहीं लगता
थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाता है
इलेक्ट्रोपैथी के अनुसार यह पाचन और रक्त की अशुद्धता का संकेत हो सकता है, जिसका असर किडनी पर भी पड़ता है।
जब शरीर में गंदगी जमा होने लगती है, तो उसका असर पेट और दिमाग दोनों पर पड़ता है।
मरीज को:
सुबह उलटी जैसा मन
दिन में कई बार जी मिचलाना
मुंह का स्वाद बिगड़ना
जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
इलेक्ट्रोपैथी में त्वचा को शरीर की अंदरूनी हालत का आईना माना जाता है।
अगर बिना किसी एलर्जी के:
त्वचा में लगातार खुजली
ज्यादा ड्राईनेस
जलन या खिंचाव
तो यह संकेत हो सकता है कि खून पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहा, और किडनी पर दबाव है।
कई मरीज बताते हैं कि:
“पहले इतना नहीं होता था, अब थोड़ा चलने पर ही सांस फूल जाती है।”
इलेक्ट्रोपैथी के नजरिए से यह दो वजहों से हो सकता है:
शरीर में पानी जमा होना
खून की गुणवत्ता कमजोर होना
दोनों ही स्थितियों में किडनी की भूमिका अहम होती है।
किडनी और ब्लड प्रेशर का रिश्ता बहुत गहरा है।
अगर बीपी की दवा लेने के बाद भी:
ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं रहता
या अचानक बीपी बढ़ने लगता है
तो इलेक्ट्रोपैथी में इसे किडनी असंतुलन का बड़ा संकेत माना जाता है।
हर कमर दर्द किडनी से जुड़ा नहीं होता, लेकिन अगर दर्द:
लगातार बना रहे
एक तरफ ज्यादा हो
पेशाब की परेशानी के साथ हो
तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Electropathy practice में देखा गया है कि इन लोगों में किडनी की समस्या जल्दी बढ़ सकती है:
डायबिटीज के मरीज
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
जो बहुत कम पानी पीते हैं
जो बार-बार दर्द की दवाएं लेते हैं
जिनकी लाइफस्टाइल बहुत अनियमित है
जिनके परिवार में किडनी रोग रहा हो
इलेक्ट्रोपैथी में इलाज का मतलब सिर्फ दवा नहीं होता। फोकस रहता है:
शरीर की अंदरूनी सफाई सुधारने पर
पाचन और लसीका सिस्टम को संतुलित करने पर
पानी और मिनरल बैलेंस ठीक करने पर
शरीर की प्राकृतिक कार्यक्षमता बढ़ाने पर
जब शरीर का संतुलन सुधरता है, तो किडनी पर से दबाव अपने-आप कम होने लगता है।
(इलेक्ट्रोपैथी दृष्टिकोण)
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
बहुत ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड खाना कम करें
समय पर और हल्का भोजन लें
बिना जरूरत दर्द की दवाएं न लें
रोज थोड़ा चलना-फिरना जरूरी है
नींद और मानसिक शांति पर ध्यान दें
अगर:
पेशाब में खून दिखे
अचानक बहुत ज्यादा सूजन आ जाए
पेशाब बहुत कम हो जाए
सांस बहुत ज्यादा फूलने लगे
तो देर न करें और जांच जरूर करवाएं।
इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सक के रूप में हमारा अनुभव यही कहता है कि Kidney खराब होने से पहले शरीर कई छोटे-छोटे संकेत देता है।
थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव, भूख की कमी – ये सब सामान्य नहीं हैं, बल्कि शरीर की चेतावनी हैं।
अगर इन संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए और शरीर का संतुलन सुधारा जाए, तो किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
याद रखें — बीमारी अचानक नहीं आती, हम संकेतों को नजरअंदाज करते हैं।
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Dr. Jitender Tomar is an Electropathy practitioner with 23+ years of clinical experience in natural and holistic healthcare. Through Dr Tomars Wellness, he shares educational insights on preventive health, early disease symptoms, and lifestyle-based wellness approaches to help readers make informed health decisions.
Dr. Jitender Tomar™ – TEDx Speaker, Founder of Dr. Tomars Wellness™, Doctor2Brand™, and Visionary of the Chemical-Free India™ Movement.
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